Thursday, May 18, 2017


यहाँ हर कोई मशहूर
हर कोई नशे में चूर

पूरी हो रही ख्वाइश पे ख्वाइश
और अपने नेटवर्थ की नुमाईश

घर, कार, फार्म हाउस, विदेश यात्रा के झंडे
फेसबुक वाले ५००० फ्रेंड,और ट्विटर के फंडे

हर कोई बदल रहा भेस
छुपा रहा कोई ऐसी टेस
जो समझ से परे है
पर चुभन से भरे है

ढलती उम्र और हर फूली हुई साँस
पल पल बढ़ा रही जिसका अहसास

अंत होता अस्त के पूर्व
इस पथ का भले विधान
भीड़ सारी इसी राह पर
झूठी हसी दबी आह पर

अङ्गं गलितं पलितं मुन्डं दशनवीहीनं जातं तुन्डम् ।
बृद्धो यति गृहीत्वा दन्डं तदापि न मुञ्चत्याशापिन्डम् ॥


- आदि शंकराचार्य